स्टेशन पर पार्किंग के नाम पर यात्रियों से लूट:
जागरण संवाददाता, बक्सर : बक्सर रेलवे स्टेशन से बलिया व गाजीपुर समेत पूरे जिले से यात्री ट्रेन पकड़ने आते हैं। परंतु, यहां कहीं भी गाड़ी पार्क करने की जगह नहीं है। सुरक्षा बल ताक में रहते हैं कि कोई दोपहिया वाहन यहां छोड़ कर थोड़ी देर के लिए भी जाये और अपनी 'बात बन' जाये। स्टेशन पर एक लाइसेंसी पार्किंग है भी तो उसकी क्षमता काफी कम है और पार्किंग का किराया पटना जैसे बड़े शहरों से भी ज्यादा है।
दो पहिया वाहनों के पार्किंग हेतु दो पहिया वाहन स्टैण्ड का ठेका दे रखा है। ठेकेदार इसका लाभ उठाते हुए वाहन मालिकों को लूटने का धंधा करते है। वाहन दस मिनट के लिए इसमें लगे या दस घंटे के लिए वाहन मालिकों से दस रुपये वसूले जाते हैं। जबकि, स्टेशन के पूर्वी क्षेत्र में रेलवे की काफी खली जमीन पड़ी हुई है। जहां वाहनों को खड़ा करने की अनुमति दी जा सकती थी। और नही तो स्टैण्ड में लगने वाले वाहनों का शुल्क कम कर उसे सर्व सधारण के उपयोग में लाने की पहल बेहतर होती। लेकिन, इस संबंध में कोई भी पदाधिकारी कुछ भी कहने से परहेज कर रहा है। स्टेशन के अधिकारी मामले को एक-दूसरे पा टालते हैं। ऐसे में टेम्पू व दो पहिया वाहन का ठेका कितने में हुआ और उसकी वैद्यता कब तक है, इसका भी पता स्थानीय स्टेशन के अधिकारियों को नहीं है। पार्किंग की क्षमता सौ वाहनों की है, लेकिन पहले से ही तीन सौ वाहन लगे होते हैं। ऐसे में यात्री अपनी बाइक कहां लगाये। गलती से अगर कोई अपना वाहन सुरक्षित क्षेत्र में लगा दिये तो फिर जीआरपी वाले उसके पीछे पड़ जाते हैं। यही स्थिति टेम्पो स्टैण्ड का है। बारह घंटे के लिए टेंपो चालकों से 25 रुपये वसूले जाते हैं और आटो चालक इस पैसे की भरपायी अपने यात्रियों से करते हैं। जबकि, वसूली या ठेका से आये पैसों का यात्री हित में कोई इस्तेमाल नहीं होता। आटो चालकों के लिए न तो यहां पेयजल की व्यवस्था है और न ही यात्रियों के लिए शेड की। जबकि, पड़ोस के गाजीपुर के सांसद मनोज सिन्हा ही केंद्रीय रेल राज्य मंत्री भी हैं और बड़ी संख्या में उस जिले के लोग भी यहां ट्रेन पकड़ने आते हैं।
दो पहिया वाहनों के पार्किंग हेतु दो पहिया वाहन स्टैण्ड का ठेका दे रखा है। ठेकेदार इसका लाभ उठाते हुए वाहन मालिकों को लूटने का धंधा करते है। वाहन दस मिनट के लिए इसमें लगे या दस घंटे के लिए वाहन मालिकों से दस रुपये वसूले जाते हैं। जबकि, स्टेशन के पूर्वी क्षेत्र में रेलवे की काफी खली जमीन पड़ी हुई है। जहां वाहनों को खड़ा करने की अनुमति दी जा सकती थी। और नही तो स्टैण्ड में लगने वाले वाहनों का शुल्क कम कर उसे सर्व सधारण के उपयोग में लाने की पहल बेहतर होती। लेकिन, इस संबंध में कोई भी पदाधिकारी कुछ भी कहने से परहेज कर रहा है। स्टेशन के अधिकारी मामले को एक-दूसरे पा टालते हैं। ऐसे में टेम्पू व दो पहिया वाहन का ठेका कितने में हुआ और उसकी वैद्यता कब तक है, इसका भी पता स्थानीय स्टेशन के अधिकारियों को नहीं है। पार्किंग की क्षमता सौ वाहनों की है, लेकिन पहले से ही तीन सौ वाहन लगे होते हैं। ऐसे में यात्री अपनी बाइक कहां लगाये। गलती से अगर कोई अपना वाहन सुरक्षित क्षेत्र में लगा दिये तो फिर जीआरपी वाले उसके पीछे पड़ जाते हैं। यही स्थिति टेम्पो स्टैण्ड का है। बारह घंटे के लिए टेंपो चालकों से 25 रुपये वसूले जाते हैं और आटो चालक इस पैसे की भरपायी अपने यात्रियों से करते हैं। जबकि, वसूली या ठेका से आये पैसों का यात्री हित में कोई इस्तेमाल नहीं होता। आटो चालकों के लिए न तो यहां पेयजल की व्यवस्था है और न ही यात्रियों के लिए शेड की। जबकि, पड़ोस के गाजीपुर के सांसद मनोज सिन्हा ही केंद्रीय रेल राज्य मंत्री भी हैं और बड़ी संख्या में उस जिले के लोग भी यहां ट्रेन पकड़ने आते हैं।
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