एमएसटी से न करें स्लीपर कोच में सफर, पकड़े गए तो कभी नहीं बनेगी :
ग्वालियर। अगर आप मंथली सीजन टिकट (एमएसटी) से रोज ट्रेन में यात्रा करते हैं तो जनरल कोच में ही सफर करें। अगर आप स्लीपर कोच में यात्रा करते पकड़े गए तो रेलवे हमेशा के लिए ब्लैक लिस्टेड कर देगी। आपको जुर्माना तो भरना ही होगा, साथ ही हमेशा के लिए एमएसटी निरस्त कर दी जाएगी और भविष्य में कभी भी एमएसटी नहीं बनाएगी।
ट्रेन में एमएसटी से सफर करने वाले यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अक्सर यह देखने में आता है कि एमएसटी धारक नजदीकी रेलवे स्टेशनों तक ही सफर करते हैं, इसलिए यह लोग जनरल कोच की जगह स्लीपर कोच में सफर करते हैं। नियमानुसार एमएसटी धारक केवल जनरल कोच में ही सफर कर सकता है। कई बार चेकिंग के दौरान एमएसटी धारक स्लीपर या एसी कोच में सफर करते पकड़े जाते हैं। अभी इन लोगों से जुर्माना वसूलकर छोड़ दिया जाता है। अब रेलवे एमएसटी से यात्रा करने वालों के लिए सख्त हो गया है और नियम में परिवर्तन कर दिया है। अब अगर एमएसटी धारक स्लीपर कोच में सफर करता पाया गया तो उसके नाम से भविष्य में कभी भी एमएसटी नहीं बनेगी, क्योंकि उसका नाम हमेशा के लिए एमएसटी के सर्वर में ब्लॉक कर दिया जाएगा।
अब आईडी पू्रफ के साथ घोषणा पत्र भी जरूरीः
अब एमएसटी बनवाने के लिए आईडी पू्रफ के साथ एक घोषण पत्र भी अनिवार्य किया गया है। अभी एमएसटी बनवाने के लिए फॉर्म भरने के साथ आईडी प्रूफ लगाते हैं और एमएसटी बन जाती है। नए नियम के अनुसार फॉर्म के साथ घोषणा पत्र मिलेगा और उसे भरकर देना होगा। इसमें ट्रेन में यात्रा के दौरान रेल अधिनियम का उल्लंघन न करने की घोषण करनी होगी।
एक हजार से अधिक हैं एमएसटी धारकः
ग्वालियर से कई स्टूडेंट, नौकरी पेशा और व्यवसायी दतिया, झांसी, मुरैना, आगरा तक एमएसटी से सफर करते हैं। ग्वालियर से रोज करीब एक हजार से अधिक लोग एमएसटी से यात्रा करते हैं।
ट्रेन में एमएसटी से सफर करने वाले यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अक्सर यह देखने में आता है कि एमएसटी धारक नजदीकी रेलवे स्टेशनों तक ही सफर करते हैं, इसलिए यह लोग जनरल कोच की जगह स्लीपर कोच में सफर करते हैं। नियमानुसार एमएसटी धारक केवल जनरल कोच में ही सफर कर सकता है। कई बार चेकिंग के दौरान एमएसटी धारक स्लीपर या एसी कोच में सफर करते पकड़े जाते हैं। अभी इन लोगों से जुर्माना वसूलकर छोड़ दिया जाता है। अब रेलवे एमएसटी से यात्रा करने वालों के लिए सख्त हो गया है और नियम में परिवर्तन कर दिया है। अब अगर एमएसटी धारक स्लीपर कोच में सफर करता पाया गया तो उसके नाम से भविष्य में कभी भी एमएसटी नहीं बनेगी, क्योंकि उसका नाम हमेशा के लिए एमएसटी के सर्वर में ब्लॉक कर दिया जाएगा।
अब आईडी पू्रफ के साथ घोषणा पत्र भी जरूरीः
अब एमएसटी बनवाने के लिए आईडी पू्रफ के साथ एक घोषण पत्र भी अनिवार्य किया गया है। अभी एमएसटी बनवाने के लिए फॉर्म भरने के साथ आईडी प्रूफ लगाते हैं और एमएसटी बन जाती है। नए नियम के अनुसार फॉर्म के साथ घोषणा पत्र मिलेगा और उसे भरकर देना होगा। इसमें ट्रेन में यात्रा के दौरान रेल अधिनियम का उल्लंघन न करने की घोषण करनी होगी।
एक हजार से अधिक हैं एमएसटी धारकः
ग्वालियर से कई स्टूडेंट, नौकरी पेशा और व्यवसायी दतिया, झांसी, मुरैना, आगरा तक एमएसटी से सफर करते हैं। ग्वालियर से रोज करीब एक हजार से अधिक लोग एमएसटी से यात्रा करते हैं।
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